Category: साहित्य

गंगा प्रसाद अरुण के दू गो गजल

(1) छलकत तलफत नजर, त बरबस गजल भइल. लहसल लहकत दहर, त बरबस गजल भइल. अद बद पनघट पर जब परबत पसर गइल, सइ-सइ लहरल लहर, त बरबस गजल भइल. चटकल दरपन चमकल दहक-सहक बन-बन, समय गइल जब ठहर, त बरबस गजल भइल. अलकन पर, मद भरल नयन, मनहर तन पर,...

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अछूत के कहानी

-(स्व॰) हीरा डोम हमनी के राति दिन दुखवा भोगत बानी हमनी के सहेबे से मिनती सुनाइबि हमनी के दुख भगवनवो न देखता जे हमनी के कब से कलेसवा उठाइबि पदरी सहेब के कचहरी मे जाइबि जा बेधरम होके रंगरेज बनि जाइबि हाय राम! धरम न छोड़त बनता बा जे...

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तनी हट-हटा के ….

– प्रगत द्विवेदी बचपन से आजु ले पिताजी के भोजपुरी-भोजपुरी रटत देखत अइलीं. ऊ आजु ले ना थकलन, बाकिर हमनी का जरूर घबड़ा गइली जा. भोजपुरी के पहिचान, ओकरा प्रसार आ विकास के बात-बखान सुनत हम बलिया से आके दिल्ली रहे लगनी बाकि आजु...

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भोजपुरी-मैथिली के भाव में विभोर भइल दिल्ली…

– ओेमप्रकाश अमृतांशु कविता अइसन विद्या ह जेकर उमिर दस-बीस साल ना सैकड़ो-हजारो साल होखेेेेला. जेकरा के अनपढ़ो सुन सकेला, गुनगुना सकेला. कवि के कविता के भाव में दरद, आक्रोश, प्रेम आ ढ़ेरन अभिव्यक्ति के समावेश होखेेला. कविता में...

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बदला के आगि

– डॉ॰ उमेशजी ओझा प्रशांत एगो ट्रेवल्स एजेन्सी के मालिक रहले. शहर में आवे वाला यात्रियन के शहर के देखे वाला जगहन प घुमावे खातिर अपना एजेन्सी से छोट गाडी उपलब्ध करावल उनकर काम रहे. प्रशांत के व्यपार बहुते चल निकलल रहे....

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