टैग: बतकुच्चन

बतकुच्चन – ९७

मन में एगो सवाल उठल बा कि पोसल आ पोसुआ में फरक होला कि ना? आ होला त का फरक होला. सवाल एह से उठल कि आजु चारो ओर पोसल आ पोसुआ लोग के भरमार हो गइल बा. केहू अपना चेला चाटी के पोसत बा त कुछ चेला चाटी पोसुआ होखत जात बाड़ें. अब देखीं...

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बतकुच्चन – ९६

सोचऽतानी कि अगर एके जइसन मतलब वाला कई गो शब्द ना रहीतन स त हमार बतकुच्चन कइसे चलीत. पिछला दिने ट्वीटर पर एगो सवाल मिल गइल. पूछाइल रहे कि कैमरा के हिन्दी का होई. अब फोटो खींचे वाला कैमरा के त आम बोलचाल में हिन्दीओ में कैमरे कहल...

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बतकुच्चन – ९५

सियन आ सिवान. सोचनी कि आजु के बतकुच्चन एही पर कर लीं. रउरा सोचब कि सियन आ सिवान में का संबंध? एगो कपड़ा के सिलाई, दोसर सीमा के अंत. एह दुनु में कवन रिश्ता हो सकेला? बाकि देखीं त दुनु में बहुते करीबी मिल जाई. कपड़ा के सियन टूटल आ...

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बतकुच्चन ‍ – ९४

मेरे मन कछु और है, बिधना के कछु और. सोचले त रहीं कि अबकी के बतकुच्चन में एकरा सेंचुरी के चरचा करब बाकि बाबा लस्टमानंद जी दोसर ओर खींच ले गइलन. अब मन से भा बेमन से उनकरे बात करे के पड़ी. पिछला अतवार के बाबा अपना गजइला के चरचा करत...

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बतकुच्चन ‍ – ९३

पिछला पख बलात्कार का नामे रहल. जेनिए देखी तेनिए लोग बलात्कार का खिलाफ धरना प्रदर्शन में लागल रहुवे. सोचनी कि काहे ना हमहू एही पर कुछ बतकुच्चन कर ली. फेर पता ना कब मौका मिले ना मिले. आन समय में बलात्कार के चरचा फूहड़ मानल जा सकत...

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