शब्द
– प्रो. शत्रुघ्न कुमार जानत नइखी टपके लागेला कहवा से ई शब्दन के बूंद लेके हथवा में लेखनी सोचे लागिला जब जब, बन जाला सदा कगजवा पर अक्षर उहे बूंद सादा कगजवा पर तब-तब. पढ़ एकरा केहू कही नइखे एकरा में कोई बात लिखले बाड़े ई...
Read Moreसाल का आखिरी दिने आजु जब पिछला साल के लेखा-जोखा लेबे बइठनी त एकाध खास बाति के छोड़ के कुछ ना भेंटाइल. सालो भर एह बहाने भा ओह बहाने भोजपुरी पर आपन-आपन राजनीति चमकावे के कोशिश होत रहल. हर साल का तरह एहू साल भोजपुरी के कई गो विश्व...
Read More– भगवती प्रसाद द्विवेदी सोगहग लवटब हम तहरा लगे / तहरा में जइसे लवटेले स पखेरू डैना फड़फड़ावत चहचहात ठोर चुँगियावत अपना खोंता में जइसे लगहर गाय के थान से सटल मुँह मारत बछरू लवटेला नाँद आ खूँटा का लगे जइसे लवटेलीं स बिल में...
Read Moreभोजपुरी के विकास खातिर हमनी के अपना के अपटूडेट करे के पड़ी. अंगरेजी आ हिन्दी के फेरवट वाला भोजपुरी अपनावे के पड़ी. पुरनका परम्परा, लोक गीत, लोक साहित्य के बचवले राखत हमनी के नयका जमाना के जरुरत अनुसार बदले के पड़ी, ना त हमनी का...
Read More