Tag: कविता

हम अइना हर आँगन क

– डा॰ कमलेश राय हम अइना हर आँगन क हर चेहरा के रखवार हईं राख सहेज त एगो हम, तोरऽ त कई हजार हईं. हिय में सनेह से राखी लां दुख के पीड़ा सुख के उछाह निरखी ला रोज थिर रहि के, जिनिगी के सगरी धूप छाँह. छन में अधरन के मीठ हँसी, खन...

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वाणी वन्दना

– शिवजी पाण्डेय “रसराज” हाथ जोरि करतानी बिनति तहार, मईया शारदा. सुनी लिहितू हमरी पुकार, मईया शारदा.. गरे कुंड हार शोभे, श्वेत रंग सारी, नीर क्षीर जाँचे वाला हंस बा सवारी, बीनवा बजाई के जगइतू संसार, मईया शारदा....

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हे ! विद्या के भंडारिणी

– ओमप्रकाश अमृतांशु हम बच्चा दिल के सच्चा  आईऽ गइलीं शरण में . हे ! विद्या के भंडारिणी , द नव कृपा कृपालिनी , बुद्धि – सद्बुद्धि कर द हमरो , हे माँ ! वीणावादिनी . तू दानी हे! वरदानी आईऽ गइलीं शरण में . हमहूँ  ज्ञानी...

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पाप के कमाई

– ओम जी ‘प्रकाश’ रंडी, पतुरिआ का उपर फूंकाई! चोरी क पइसा त चोरी में जाई!! तिकड़म भिड़ा लिहलऽ, धन त कमा लिहलऽ मड़ई का जगहा तूँ कोठी उठा लिहलऽ नोकर आ चाकर से गाड़ी आ मोटर से दुअरा प मेला बा चमचन के रेला बा बाकिर ना...

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बाहुबली

– शशि प्रेमदेव हे बाहुबली! बँहिआ में त हमहन के भी ओतने दम बा! बाकिर तहरा पाले लाठी, भाला, बनूखि, गोली, बम बा!! तहरे चरचा बा घरे घरे बाजे सगरो डंका तहरे काहें ना जोम देखइबऽ तूँ तहरा पेसाब से दिआ जरे चउकी से ले के चउका तक,...

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