लटकले त गइले बेटा – बतंगड़ 85
हमहीं ना बहुते लोग बस-ट्रक का पीछे लिखल तरह तरह के संदेशन के धेयान से देखेला आ ओहसे जनता के नब्ज...
Read Moreहमहीं ना बहुते लोग बस-ट्रक का पीछे लिखल तरह तरह के संदेशन के धेयान से देखेला आ ओहसे जनता के नब्ज...
Read Moreगाँव के एगो रंगदार आपन भईंसिया सड़के पर बान्हत रहुवे. आवे जाए वाला लोग ओकरा से परेशान रहलन. आखिर...
Read More– ओ. पी. सिंह पिछला हप्ता आपन बतंगड़ अधवे पर छोड़ले रहीं कि अगिला बेर एकरा के पूरा करब....
Read More– ओ. पी. सिंह हर बेर जब बतंगड़ लिखे बइठिलें त मन में कवनो ना कवनो खाका बन चुकल रहेला आ बाति...
Read More– ओ. पी. सिंह लोकतन्त्र, डेमोक्रेसी, में लोक-लाज ना रहि जाव त ओकरा दैत्यतन्त्र, डेमॉनक्रेसी,...
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