पइसवा जात कहां बा
– जयंती पांडेय राहुल गांधी अपना चुनाव प्रचार में कई हाली कहले कि गांव के विकास के खातिर जवन रुपिया आवे ला तवना में से दसे पइसा मिले ला बाकी गायब हो जाला. काफी सोचला पर ई पता ना चलल कि के खा जाला. मन में 90 पइसा हजम करे...
Read More– जयंती पांडेय राहुल गांधी अपना चुनाव प्रचार में कई हाली कहले कि गांव के विकास के खातिर जवन रुपिया आवे ला तवना में से दसे पइसा मिले ला बाकी गायब हो जाला. काफी सोचला पर ई पता ना चलल कि के खा जाला. मन में 90 पइसा हजम करे...
Read Moreबाजार के दबाव में तिल-तिल कर के मरत भोजपुरी भाषा के दुर्दशा लेके हम कुछ समय पहिले एगो उपन्यास लिखले रहीं “लोक कवि अब गाते नहीं.” इंडिया टुडे में एकर समीक्षा लिखत मशहूर भाषाविद् अरविंद कुमार तारीफ के पुल बान्हत एगो...
Read More“जनभाषा कबहियो शासन के भाषा ना होले. राजसत्ता कबहियो जनता के भाषा के राजभाषा के दरजा ना देव. फेर भोजपुरी त लोकभाषा हिय, संवेदना आ प्रतिरोध के जनभाषा. ऊ सरकार के मुँह ना जोहे. अगर संविधान के अठवीं अनुसूची में एकरा जगहा नइखे...
Read More– जयंती पांडेय ‘एगो कहावत बा कि पाकिट में दाम नइखे तऽ राउर कवनो मान नइखे। गांव में कहल जाला कि मरद के मरद रुपिया हऽ ना तऽ सब मरद के मर्दानगी बेकार. काल कई जगहि चुनाव के रिजल्ट आइल. बड़े बड़े ज्ञानी लोग कहल कि भ्रष्टाचार के...
Read Moreभोजपुरी साहित्यकार मनोज भावुक के पूर्वांचल भोजपुरी महासभा, गाज़ियाबाद पिछला 10 मार्च, 2012 के अपना सबले प्रतिष्ठित अवार्ड पूर्वांचल गौरव सम्मान से सम्मानित कइलसि. भोजपुरी के तमाम संस्थन का बीच साहित्यिक आ सांस्कृतिक संबंध मजबूत...
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