मिस्की
मिस्की ऊ जात रहल मुस्कियात रहल देखि के हालत मोरो । सोचि के कि- पहिले कतना में ऊ का रहल। मोहूँ के...
Read Moreहे ईश्वर! तनी दया करीं कई दिन तक बरसल बदरी, धानवा गिरल मेड़ के कगरी। भूख-पियास कुल गइल हेराइ,...
Read Moreबलेसरा काहें बिकाला – दयानंद पांडेय जइसे कवनो नरम अउरी मीठ ऊंख होखे। एगो गुल्ला छिलनीं त...
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